
ममता बनर्जी का बदला राजनीतिक अंदाज: दिल्ली की रैली में सोनिया गांधी को बताया अपनी नेता, विपक्षी समीकरणों पर टकटकी
नई दिल्ली 2/10/2026 INDIA Alliance : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘INDIA’ गठबंधन की 1 नवम्बर की रैली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक नया और बदला हुआ राजनीतिक तेवर देखने को मिला। ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित इस महारैली में ममता बनर्जी के बयानों और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति उनके नरम रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है। 1. सोनिया गांधी को ‘नेता’ कहना और राहुल गांधी की तारीफ ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी को “मेरी नेता” कहकर अभिवादन करने के साथ की। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को जमीन पर संघर्ष करने वाला एक “युवा नेता” बताकर उनकी जमकर सराहना की। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी का यह अंदाज कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है। 2. वामदलों और अन्य सहयोगियों को साधना अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने न सिर्फ कांग्रेस नेताओं बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी का भी विशेष रूप से नाम लिया। मंच पर उनकी यह एकजुटता विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच तैयार करने की रणनीति का संकेत देती है। 3. पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदली सियासी हवा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस के रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिली है। चुनाव परिणामों पर जब ममता ने सवाल उठाए थे, तब राहुल गांधी ने खुलकर उनका समर्थन किया था। इसके बाद ममता की दिल्ली यात्रा और सोनिया-राहुल से उनकी मुलाकात ने दोनों दलों के बीच की दूरियों को काफी हद तक कम किया है। 4. एक ही कार में सफर और मंच की नजदीकी रामलीला मैदान की इस रैली में ममता बनर्जी का एक्शन केवल भाषण तक सीमित नहीं था। वह राहुल गांधी के साथ एक ही कार में बैठकर रैली स्थल तक पहुंचीं और मंच पर भी सोनिया गांधी के ठीक बगल में बैठी नजर आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश देने की सोची-समझी रणनीति है।










































